गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

स्टील सिटी में श्री जवाहर सिंह जी के साथ

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इलाहबाद पर पहुँचते पहुँचते रात हो गयी थी ,पक्का था कि अब सो जाना चाहिए क्यूंकि बहुत सुबह का जगा हुआ था ! इसी सोने सोने में मेजा रोड , विंध्याचल , मिर्ज़ापुर , चुनार , रॉबर्टसगंज और चुर्क स्टेशन निकल गए ! चोपन स्टेशन पर इसे रात को 10 बजे पहुँच जाना चाहिए था लेकिन जब हमारी आँख खुली और देखा कि ट्रेन चोपन पर रुकी हुई है , सुबह के 6 बजे हुए थे यानि 8 घण्टे देरी से चल रही थी ट्रेन ! चोपन पर मुंह हाथ धोकर चाय पी और पानी में भीगे चने का नाश्ता किया ! मुझे बुरी आदत है कि मैं बिना मुंह धोये चाय पीता हूँ , लेकिन यहाँ कम से कम मुँह तो धो लिया था ! चोपन पर ही पहली बार वी.आई.पी प्लेटफार्म भी देखा ! फोटो लगा है उसी वी.आई.पी प्लेटफार्म का ! ऐसा होता होगा वी.आई.पी प्लेटफार्म ? चोपन के बाद रेनुकूट होते हुए निकल चले विंढमगंज स्टेशन ! ये उत्तर प्रदेश में पड़ने वाला इस लाइन पर आखिरी स्टेशन है , इससे आगे फिर झारखण्ड शुरू हो जाता है ! नगर उंटारी झारखण्ड का इस ट्रैक पर पहला स्टेशन है ! जैसे जैसे झारखण्ड में आगे चलते गए वहां के हालात से परिचित होते चले गए ! इतनी गरीबी , इतना सूखा ! इतनी खाली खेत खलिहान ? छोटे छोटे खेत , जो उनकी जीवन चलाने के लिए किसी भी तरह से शायद काफी नहीं होते होंगे ! राजधानी में एयर कंडिशन्ड कमरों में बैठे हमारे माननीयों को इधर भी कुछ ध्यान देना होगा !


झारखण्ड को क्षमा याचना के साथ झाड़खण्ड कहना ज्यादा मुफीद होगा ! हर जगह बस नीरसता , खालीपन ! हाँ , मोटर साइकल्स जरूर दिखती रहीं ! एक जगह पड़ती है गढ़वा ! जब ट्रेन उस स्टेशन पर रुकी तो कई सारे लोगों ने अपने हाथ में बन्दूक थाम रखी थी, सुनते रहे थे कि ये नक्सल प्रभावित इलाका है ! तो क्या सच में नक्सली हैं ये ? लेकिन वहां का माहौल देखकर तो ऐसा नहीं लग रहा था ! जैसे ही ट्रेन रुकी , ज्यादातर वो लोग जिनके हाथ में बन्दूक थी , हमारे ही डिब्बे में चढ़ आये ! फूंक सरक गयी अपनी ! उन्होंने एक के लिए जगह मांगी हम पूरा ही खिड़की की तरफ सरक गए ! हालाँकि बाद में बातचीत में पता चला कि वो सादी वर्दी में झारखण्ड पुलिस के लोग थे ! ऐसे होते हैं पुलिस वाले ? न ढंग से दाढ़ी बनी हुई , न बाल ठीक से कटे हुए ! लेकिन सब जींस में थे और हट्टे कट्टे थे ! हमें क्या !

जमशेदपुर में स्पष्ट रूप से कहूँ तो देखने को कुछ भी नहीं है ! बस , टाटा का नाम जपते रहिये ! लेकिन इतना है की वहां के लोगों की पिकनिक बहुत सुन्दर बन जाती है ! यानी एक दिन आप बढ़िया गुजार सकते हैं ! सब कुछ टाटा का दिया हुआ है जमशेदपुर को ! शहर के नाम से लेकर बिजली पानी तक ! सब कुछ टाटा !

जमशेदपुर पहुँचते ही श्री जवाहर सिंह जी और मित्र सुशील शर्मा को सूचित कर दिया ! टाटा नगर पहुँचते पहुँचते हमारी ट्रेन 10 घंटे लेट हो चुकी थी ! ये 12 अप्रैल का दिन था जो ख़त्म हो रहा था ! सुशील से बात हुई तो मिलने का प्रोग्राम भी फिक्स हुआ और हम करीब 9 बजे रात को उसके यहां जा धमके ! खाना वाना खा पीकर होटल पहुंचे ही होंगे कि श्री जवाहर सिंह जी का फोन आ गया कि कल मैंने शिफ्ट बदल ली है , अब मैं शाम को कंपनी जाऊँगा ! पक्का हो गया कि अगले दिन श्री जवाहर सिंह जी के यहां जाना है !

अगले दिन यानी 13 अप्रैल को अपना कॉलेज का काम ख़त्म करके करीब दोपहर 2 बजे हम श्री जवाहर जी के यहां पहुँच गए ! खाना खाया , बल्कि ज्यादा खाया क्यूंकि श्रीमती जवाहर सिंह जी ने खाना ही इतना स्वादिष्ट बनाया था ! अब बस यही सोच थी कि ए.सी. की ठण्डक में एक नींद ले ली जाए लेकिन समय इजाजत नहीं दे रहा था इसलिए वहां से जुबिली पार्क के लिए निकल चले !



भारतीय रेलवे का वी आई पी प्लेटफार्म




भारतीय रेलवे का वी आई पी प्लेटफार्म






ट्रेन से दिखता हिंडालको प्लांट


बहुत सुन्दर स्टेशन है ये
उत्तर प्रदेश का इस लाइन पर आखिरी स्टेशन
झारखण्ड का इस लाइन पर पहला स्टेशन
नक्सलवाद से प्रभावित लातेहार

शायद बड़ा भाई काना रहा होगा उसी के नाम पर बड़का काना यानी बरकाकाना
झाड़खण्ड
झाड़खण्ड

यहाँ रांची के लिए ट्रेन बदल सकते हैं
जमशेदपुर से बिलकुल पहले का स्टेशन ! बंगाल में पुरुलिया की तरफ की गाड़िया इधर से निकलती हैं

मुरी पर हालत खराब सी हो गयी थी बैठ बैठे ट्रैन में 








                                                           आखिर टाटा नगर पहुँच ही गए



                                               आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी के साथ


विश्व प्रसिद्द मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट 


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