सोमवार, 30 जून 2014

दिस इस यमराज कॉलिंग फ्रॉम ………………

संडे था ! सोचा था देर तक सोऊंगा ! लेकिन पता नहीं सबको मेरी तरह नींद क्यों नहीं आती , 7 बजे होंगे किसी ने मोबाइल बजा दिया ! लम्बा हाथ करके मोबाइल उठाया और हैल्लो करी तो उधर से अंग्रेजी में आवाज़ आई – कैन आई स्पीक टू मिस्टर योगी सारस्वत ? मैंने भी अंग्रेजी में ही बोल दिया – याह ! स्पीकिंग ! तब तक वो दोबारा बोल गया – दिस इस यमराज कॉलिंग फ्रॉम ……….. ! कौन यमराज ? यार मेरी नींद मत खराब करो ! मैं किसी यमराज को नहीं जानता ! और मैंने फोन काट दिया ! फ़ोन फिर घनघनाया ! मैंने दो बार तो नहीं उठाया , लेकिन जब वो लगातार बजता रहा तो उठा ही लिया !

हाँ – बोल भाई !

सर दिस इस यमराज कॉलिंग फ्रॉम …………………. !

यार बता भाई युवराज ! कौन सा युवराज बोल रहा है ? इंडियन टीम वाला , मेरे कॉलेज वाला या वो कोने वाला ? कौन सा युवराज ? नो सर ! दिस इज़ यमराज , नॉट युवराज ! भाई देख तू अब मेरा दिमाग मत खराब कर सुबह सुबह ! एक तो तूने मेरी नींद खराब कर दी और अब ये बेसिर पैर की बातें कर रहा है ! कौन है तू और क्या चाहता है ? जल्दी बता , मुझे अभी और सोना है ! और हाँ , हिंदी में बोल ! मुझे हिंदी आती है !
ओके ! सर ! मैं यमराज बोल रहा हूँ !
मेरा दिमाग झन्ना गया – अबे यार बता न कौन बोल रहा है ! नहीं तो मैं अब फोन काट दूंगा !
नो सर, प्लीज ! आप मेरी बात तो सुन लीजिये पहले ! सर मैं यमराज ही बोल रहा हूँ स्वर्ग से ! आपका टिकेट कन्फर्म हो गया है स्वर्ग का !
यार मेरा कौन सा टिकेट कन्फर्म हो गया है ? मैंने तो कोई टिकेट कराया ही नहीं ? फिर तूने कैसे कन्फर्म कर दिया ? अबे पागल समझा है क्या ? और कहाँ का कन्फर्म कर दिया स्वर्ग का ? अबे ऐसे मैं कौन कश्मीर जाने बैठा है ! बच्चो के स्कूल खुलने वाले हैं , तू पागल तो नहीं है कहीं ? मेरा कोई टिकेट विकेट नहीं है , कैंसिल कर दे अगर कर दिया है तो ! अब सो जाऊं ?
अरे सर ! हमें आना है आपको लेने के लिए ! आप तैयार रहिये ! आपके लिए सीट तैयार करी जा रही है !

अबे तुम बिलकुल ही पागल हो क्या ? गजब करते हो यार ! मैंने टिकेट लिया नहीं , मुझे मालुम नही कि मुझे कहीं जाना भी है और तुम हो कि कह रहे हो कि तुम मुझे लेने आ रहे हो ? तुम्हारे बाप का राज है क्या ? और जाने आने और दुसरे खर्च के पैसे कौन देगा , तुम्हारा फूफा ?

नहीं सर ! बाप और फूफा की कोई बात नहीं है ! आपको लाने के लिए न हमें पैसों की जरुरत है न आपको ! सब फ्री हो जाता है , मजे मजे में ! बस आप तैयार रहिये !

ओह ! तो ऐसे कहो न ! मेरा कोई ऑफर होगा ! मतलब मैंने कुछ जीता होगा , दो या तीन रात का फ्री ? ऐसा कुछ न ! चलो बताओ कब चलना है ? मैं फिर छुट्टियां डाल देता हूँ कॉलेज में !
नहीं सर ! अब आपको छुट्टियां लेने की कोई जरुरत नहीं !
सही कह रहे हो बेटा ! तुम हमारे बॉस को जानते नहीं हो ! चलो ठीक है , मुझे बता देना कब चलना है ! ओके ! और हाँ यार , ये नाम बदल लो ! यमराज ! ये कोई नाम है ? इससे तो युवराज ही कर लो !

सर मेरा यही नाम है ! आप मुझे अब भी पहिचान नहीं पा रहे ! मैं असली यमराज हूँ !
फिर मजाक !
नहीं सर ! आप कहो तो आपको आपकी पिछली जिंदगी का सब कुछ बता देता हूँ , तब तो आप मानोगे कि मैं असली यमराज हूँ ! और हकीकत में उसने सब बयान कर दिया ! दिल बैठ गया !
क्या -तुम सचमुच के यमराज हो ?

रुको ,एक मिनट !
फ़ोन बंद किया ! नंबर देखा ! अरे भगवान ! ये 50 डिजिट का नम्बर ! ये तो सच में ही यमराज है ! कॉल बैक करी – आवाज़ आई ! ये इस दुनियां का नम्बर नहीं है , कृपया नंबर जांच लें ! अब तो मैं पसीना पसीना !
इतनी देर में फिर उसका फोन आ गया !
ओह ! तो तुम मेरी सच्चाई पता कर रहे थे ! मैं कोई स्पेशल 26 का नकली सीबीआई अफसर नहीं हूँ ! तैयार रहना ! हम जल्दी ही आएंगे !

अरे सुनो तो भाई ! एक बात तो बताओ ! माना तुम यमराज हो , लेकिन यमराज तो सिर्फ संस्कृत या हिंदी बोलते हैं तुम अंग्रेजी क्यों बोल रहे हो ?
अब क्या है कि हिंदुस्तान में भी बहुत से लोगों को हिंदी या संस्कृत समझ में नही आती इसलिए हमारे यहां ये सिखाया जाता है कि भारत में भी अंग्रेजी से शुरुआत करो ! अब हमारे यहां भी 90 दिनों में अंग्रेजी सीखें वाले कोर्स चल रहे हैं !
हम्म्म !
और तुम ये फोन करके इन्फॉर्म कबसे करने लगे ?
ये भी जरुरी हो गया है अब ! होता क्या है कि अब बिना नंबर के बहुत से लोग अपना टिकेट काट लेते हैं , उनसे हमारा रजिस्टर मैंटेन करना मुश्किल हो जाता है इसलिए हम पहले से इन्फोम कर देते हैं जिससे सही आदमी सही जगह पर जाए !
हम्म्म्म !
अब तुम तैयार रहना !

अरे यार , सुनो तो ! सुनो ! कुछ ले दे के काम चल जाए तो ठीक है न ?
क्या ?
यार मेरी जगह कहीं और से उठा ले ! ले दे के मामला सुलझा ले यार ! अभी देखियो मुझे बहुत सारे ब्लॉग लिखने हैं यार ! जो तेरा बनता हो , मैं दे दूंगा !
उसने थोड़ी देर सोचा ! फिर बोला ! हाँ यार ! तेरे ब्लॉग तो मैं भी पढता हूँ , बढ़िया लिखता है ! चल तुझे थोड़ा टाइम और देता हूँ ! लेकिन मेरे लिए तुझे एक ब्लॉग लिखना पड़ेगा !
पक्का ! जरूर लिखूंगा !
लेकिन यार तेरी जगह किसका टिकेट कन्फर्म करूँ ? मुश्किल हो रही है !
मैंने धीरे से फुसफुसाया – ईराक से देख ले , मेरे जैसा एक आध तो मिल ही जाएगा !
अरे , हाँ ! सही आईडिया दिया तूने ! चल फिर ऐश कर ! मजे मार ! बाय
बाय ! धन्यवाद यमराज भाई ! बहुत बहुत धन्यवाद ……………. तेरी वजह से मुझे …………।
अबे अब चुप कर , मुझे भी रुलाएगा क्या ! चल मजे कर ! मैं ईराक निकलता हूँ अपना टारगेट पूरा करने !

मंगलवार, 17 जून 2014

अमां मियाँ हौज़ ख़ास नाम ऐसे ई नहीं है

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हौज़ ख़ास देश विदेश में आई आई टी के कारण ज्यादा फेमस है लेकिन इसी हौज़ ख़ास में देखने को , वीकेंड बिताने को बहुत  कुछ है ! हौज़ ख़ास तक मेट्रो लीजिये या फिर ग्रीन पार्क तक बस या टैक्सी जैसा मन करे वो लीजिये और एक दिन बढ़िया तरह से एन्जॉय करिये ! 

हौज़ मतलब पानी का टैंक या छोटी सी झील और ख़ास मतलब ख़ास लोगों के लिए ! ख़ास मतलब रॉयल , शाही लोगों के लिए ! साउथ दिल्ली के केंद्र में स्थित हौज़ ख़ास में आपको शहरी और ग्रामीण दौनों तरह का जीवन देखने को मिलेगा हालाँकि ग्रामीण जीवन ऐसा नहीं कि आप हौज़ ख़ास गाँव देख लें और ये अनुमान लगा लें कि उत्तर प्रदेश और बिहार के गाँव भी ऐसे ही होते होंगे ! हालाँकि मैं जब उस रास्ते पर पैदल पैदल जा रहा था तो वहां एक कूड़ा करकट इकठ्ठा करने का घर सा बना हुआ है , कुछ लोग उस गंदे कूड़े को नंगे हाथों से उठाकर ट्रक में भर रहे थे , कितनी भयंकर बदबू आ रही , राम राम ! कैसे कर लेते हैं वो ऐसा ? पेट की खातिर ? क्या और कोई तकनीक नहीं ! इतनी बुरी सड़ांध तो मेरे  उत्तर प्रदेश के गाँव से भी नहीं उठती होगी, पॉलिटिक्स की सड़ांध की बात नहीं कर रहा हूँ !

हौज़ ख़ास को सीरी फोर्ट में रहने वाले लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए अल्लाउद्दीन ख़िलजी ने 1296 ईस्वी से 1316 ईस्वी के बीच बनवाना शुरू किया था ! वो झील अभी तक जिन्दा है लेकिन उसके आसपास ज्यादातर या तो खँडहर हो चूका है या फिर कब्जाया जा चूका है लेकिन जो कुछ भी बचा है उसे ASI पूरी तरह संजोये रखना चाहती है ! हौज़ ख़ास गाँव और अन्य किसी गाँव में थोड़ा अंतर है ! अंतर ये है कि हौज़ ख़ास गाँव में आपको बीना रमानी जैसे डिज़ाइनर के बुटीक और टॉप लेवल के रेस्टोरेंट्स दिखेंगे , मॉडर्न लोग दिखेंगे ! फोटो शूट कराती मॉडल भी मिल सकती है ! मैं सौभाग्यशाली रहा क्यूँकि मैंने पहली बार ओपन में किसी महिला मॉडल का फोटोशूट होते हुए देखा ,  वो भी इतने कम कपड़ों में !  उस वक्त कुछ पल के लिए मुझे लगा कि मैं शायद हिंदुस्तान से बाहर हूँ ! यहाँ मेरी  मानसिकता गलत नहीं है , बल्कि मेरी मानसिकता गाँव की है ! खैर ! 

इसी हौज़ ख़ास गाँव के शुरू होने पर डियर पार्क और रोज़ गार्डन हैं ! डियर पार्क में आपको हिरन मस्ती करते हुए बहुत नजदीक से देखने को मिलेंगे ! इस डियर पार्क का नाम मशहूर समाज सेवी आदित्य नाथ झा के नाम पर ए. एन. झा डियर पार्क है । लेकिन अगर आप डियर पार्क के बिलकुल अपोजिट रोज़ गार्डन में ये सोचकर जा रहे हैं कि वहाँ  सारे तरह तरह के गुलाब  मिलेंगे तो फिर आपको निराशा होगी ! हाँ , वैसे घूमने लायक जगह तो है ये ! और जब गाँव को पार करते हैं तो लगभग आखिरी छोर पर है मशहूर हौज़ ख़ास झील और हौज़ ख़ास कॉम्प्लेक्स और उससे लगी हुई मीनारें और गुम्बद !


इसी रास्ते पर जगन्नाथ जी को समर्पित श्री नीलाचल सेवा संघ द्वारा निर्मित खूबसूरत मंदिर भी है ! आइये फोटो देखते हैं :




नीलचला मंदिर

नीलचला मंदिर की ऊपरी मंजिल



रात के समय प्रकश में नहाया नीलचला मंदिर

डियर पार्क


डियर पार्क में बहुत नजदीक से हिरणों को देखा जा सकता है














डियर पार्क में एक गमला टाइप कुछ लगा रखा है


डियर पार्क के सामने ही है रोज़ गार्डन


ये भी रोज़ गार्डन है







हौज़ ख़ास कॉम्प्लेक्स






























इस कॉम्प्लेक्स में बच्चे म्यूजिक की प्रैक्टिस के लिए आते हैं , एक क्लिक



हौज़ ख़ास







                                                                                             
जल्दी ही मिलेंगे एक और यात्रा वर्णन के साथ