गुरुवार, 19 मार्च 2015

उदयपुर से एकलिंगजी

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पूरा एक दिन उदयपुर में व्यतीत करने के बाद जब लगा कि अब ऐसी कोई महत्वपूर्ण जगह देखे बिना नहीं रही है तो वापस होटल लौट लिए ! होटल बस स्टैंड के सामने वाली रोड पर था अम्बा पैलेस ! लौटते लौटते आठ बज गए ! अब खाने का भी समय था ! पूरा दिन इधर उधर घूमते हुए जो कुछ मिला था , वही खाकर काम चला लिया था तो अब खाना ही खाना था ! बस स्टैंड के पास में ही एक बढ़िया सा खाने का स्थान दिखाई दिया , शानदार नाम था शायद उसका ! बढ़िया जगह लगी ! हमारे लायक ! 130 रुपये की थाली ! राजस्थानी ले लो या गुजराती ! 20 रुपये का पराठा ! कुल मिलाकर सस्ता और बेहतर ! इतना थक चुके थे और इतना खा लिया था कि ऐसा लगा कि अब बस होटल पहुंच जाएँ ! यही हुआ ! जाते ही बिस्तर पर पड़ गए ! ऐसे हालत में , जब आप सुबह से ही घूम रहे हैं सबकी हालत यही हो जाती है ! लेकिन सोने से पहले कल का प्रोग्राम जरूर बना लिया था !

जैसा कि अक्सर होता है , कार्यक्रम के अनुसार हमें आठ बजे होटल से निकल जाना था लेकिन जनवरी के मौसम में बच्चों के साथ आठ बजे जागना ही बहुत मुश्किल हो जाता है , तैयार होकर निकलना तो बहुत बड़ी बात हो जाती है ! खैर जैसे तैसे 9 बजे हम होटल से निकलकर बस स्टैंड पहुंचे ! नाश्ता किया और फिर बस के विषय में जानकारी ली ! आजकल टेक्नोलॉजी ने बहुत से काम आसान कर दिए हैं ! ट्रेन के विषय में कुछ पता करना हो , ऍप्स है न ? बस के विषय में कुछ जानना हो , ऍप्स है न !! लेकिन छोटी छोटी बातों के लिए एप्प रखना मुझे पसंद भी नही और शायद जरुरत भी नही ! पूछताछ खिड़की सामने हो और आप एप्प यूज़ करें ? एकलिंगजी जाने के बारे में पता किया तो उसने तुरंत टिकेट काट दी ! दो टिकट थे ! अभी बच्चों को मुफ्त ही चला रहा हूँ ! हालाँकि एक छह साल का हो गया है ! एक टिकट 22 रुपये का और दूसरा 16 रुपये का ! अंतर इस वजह से क्योंकि राजस्थान में महिलाओं को बस में 30 प्रतिशत की छूट मिलती है !! टिकट एकलिंगजी के नाम से नहीं बनता बल्कि कैलाशपुरी के नाम से बनता है ! वहां के स्थानीय लोग भी उस जगह को कैलाशपुरी ही कहते हैं , एकलिंगजी हमारे और आपके लिए है ! उदयपुर से नाथद्वारा जाने वाली रोड पर उदयपुर से करीब 22 किलोमीटर दूर !

भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर को सिसोदिया शासकों ने सन 971 में बनवाना शुरू किया ! एकलिंगजी यानि भगवान शिव मेवाड़ राज्य के आराध्य देव माने जाते हैं ! ये एक तरह का काम्प्लेक्स है जिसमें 108 छोटे बड़े मंदिर हैं ! आज का जो रूप इस मंदिर का है वो 15 वीं शताब्दी का है ! छोटे छोटे मंदिरों को मंडप के रूप में बनाया गया है ! बाहर से देखने पर ऐसा लगेगा मानो ये कोई खँडहर होगा लेकिन जब दरवाजे से अंदर जाते हैं तो इसका एक भव्य रूप दिखाई देता है ! बाहर का दरवाज़ा ऐसा है जैसा आमतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाँवों में बड़े बड़े घरों में होता है यानि हवेलियों में ! लकड़ी का बहुत बड़ा सा दरवाज़ा, ऊपर की तरफ से थोड़ा सा अर्धवृत्ताकार ! अंदर का मुख्य मंदिर पुराने रूप की स्थापत्य कला का बेहद बेहतरीन नमूना है ! इस मंदिर में भगवान शिव चार चेहरे के साथ विराजमान हैं ! इसी काम्प्लेक्स में भगवान लकुलीश को समर्पित भारत का एक मात्र मंदिर भी स्थित है किन्तु उसे आजकल श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिया गया है , क्यों ! मुझे नहीं मालुम ! ये इस काम्प्लेक्स के बिलकुल पीछे की ओर स्थित है जिसे आप देख तो सकते हैं किन्तु वहां जाकर भगवान के दर्शन नहीं कर सकते !

एकलिंगजी भगवान के दर्शन करने में तो जो आनंद आया वो बयान नहीं किया जा सकता ! भगवान की मूर्ति पांच दरवाज़ों के अंदर रखी हुई है ! पहला कमरा खाली , दूसरा और तीसरा भी खाली और चौथे में भगवान विराजमान हैं पांचवां फिर खाली ! ये शायद खाली कमरे वहां के पुजारियों के काम आते होंगे ! चौथे में भगवान को विराजमान किया हुआ है ! दर्शन करने में बहुत ज्यादा भीड़ भाड़ यानि 27 जनवरी को तो नहीं मिली ! आराम से दर्शन किये , प्रसाद लिया और थोड़ी देर बैठे भी ! मंदिर की स्थापत्य को देखने और उसकी खूबसूरती को निहारने के लिए। मुख्य द्वार पर चौखट के तीनों तरफ चांदी लगाईं हुई है जिससे उसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है ! मूर्ति के ऊपर भगवान को पञ्च स्नान कराने के लिए एक छतरी लगा रखी है , ये प्रयोग मुझे बहुत ही पसंद आया ! मथुरा में बांके बिहारी मंदिर में शायद बाल्टी से भगवान को स्नान करवाते हैं !

एकलिंगजी जी के दर्शन करने के पश्चात इधर उधर के फोटो लेने लगा ! हालाँकि वहां स्पष्ट लिखा है कि फोटो लेना सख्त मना है और वो कैमरा वहीं लॉकर में रखवा लेते हैं लेकिन मैंने सिक्योरिटी वाले की नजर से बचा के छोटा कैमरा अपनी पॉकेट में रख लिया था ! मैं सिक्योरिटी वालों की नज़रों से बचके फोटो खींचता रहा और बहुत फोटो खींच भी लिए थे ! कैमरा वापस अपनी जेब में रख लिया ! सिक्योरिटी वालों ने मुझे देख भी लिया था और एक बार मना भी किया था ! लेकिन 15 फोटो खींचने के बाद जैसे ही मैंने एक फोटो और ली , एक सिक्योरिटी वाला मेरे पास आया और बोला आप मान नही रहे हैं , आप कैमरा दीजिये अपना ! मैंने उसे कहा -मेरे पास कैमरा है ही नहीं ! लेकिन वो मुझे मुन्तजिम कार्यालय ( कंट्रोल ऑफिस ) ले गया और वहां मेरे  द्वारा खींचे गए एकलिंगजी के सब फोटो डिलीट करा दिए ! नालायक !! मेरा भी लालच था अन्यथा अगर मैं एक फोटो और न खींचता तो शायद पकड़ा भी न जाता ! इसलिए एकलिंगजी के जो भी फोटो आपको यहां मिलेंगे वो सब इंटरनेट से एकत्रित किये हुए हैं या मेरी पत्नी ने लिए हैं अपने मोबाइल से ! क्षमा चाहूंगा !

इसी मंदिर के पीछे महाराणा रायमल द्वारा 1473 से लेकर 1509 तक बनवाए गए कई मंदिर और भी हैं और एक महल भी है ! इनमें से सिर्फ एक ही में भगवान शिव की मूर्ति स्थापित है !

आइये कुछ फोटो देखते हैं इसके बाद नाथद्वारा चलेंगे !!


बाहर से देखने पर एकलिंगजी मंदिर किसी ग्रामीण इलाके का मंदिर लगता है








सड़क के ऊपर महल
एकलिंग जी के पीछे भी मंदिर और खंडहरनुमा महल हैं लेकिन शायद 100 में से 10 लोग भी उधर नहीं जाते
एकलिंग जी के पीछे के  मंदिर
एकलिंग जी के पीछे के  मंदिर

ये कभी महल रहा होगा , आज खंडहर है

ये कभी महल रहा होगा , आज खंडहर है
एक नमूना ये भी देखिये!
इसे नाला कहियेगा या महल का दरवाज़ा
ये भी एक महल है और इसके बाशिंदे कभी कभी यहां आते हैं
पीछे की तरफ से खींचा गया एकलिंग जी मंदिर का चित्र
पीछे की तरफ से खींचा गया एकलिंग जी मंदिर का चित्र

और ये एक लंगूर , दिख रहा है ? 




                                                                                     आगे यात्रा आगे भी जारी रहेगी  : 




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