मंगलवार, 2 जून 2015

बोधगया : बिहार


अप्रैल का महीना आते ही कॉलेज की तरफ से एक लंबा सा "टूर " मिलने की आशा बन जाती है। कॉलेज का विज्ञापन करने के लिए दूर दूर जाना पड़ता है। पिछली बार जमशेदपुर जाने का अवसर मिला था और इस बार पटना के लिए नाम आया था लेकिन पटना में देखने -घूमने के लिए ज्यादा कुछ नही दिखा तो दूसरी जगह मिली मुजफ्फरपुर। लेकिन संयोग कुछ ऐसा बना कि मुजफ्फरपुर से भी नाम हट गया और फाइनल गया जाना तय हुआ । फाइनल होते ही अब रिजर्वेशन की बात थी। दिल्ली -हावड़ा रूट पर आपको पता ही है कितना मुश्किल होता है ट्रेन का आरक्षण पाना और वो भी केवल 10 दिन पहले। लेकिन तत्काल में मगध एक्सप्रेस में आरक्षण मिल ही गया मुगलसराय तक। मगध एक्सप्रेस , मुगल सराय थोड़ा बहुत लेट करीब 10 बजे पहुँच गई और अब गया जाने के लिए पुरुषोत्तम एक्सप्रेस का इंतज़ार करने लगे। धीरे धीरे पुरुषोत्तम भी लेट होने लगी और जब प्लेटफार्म पर पहुंची तो पूरा ढाई घण्टा लेट थी , इसी के साथ साथ अब अकाल तख़्त भी आ गयी। ये बढ़िया हुआ। भीड़ दो ट्रेन में बट गयी। जनरल टिकट लेकर स्लीपर में जा बैठे। न टीटीई आया और न हमने सीट छोड़ी गया तक।

अब बस सीधा कोई सस्ता सा कमरा देखा जाए जिससे नहा धोकर फ्रेश हो जाएँ। दो लोगों के लिए 600 रुपये , ज्यादा भी नही था। हालाँकि कॉलेज ने 1500 रूपये की लिमिट दी हुई थी। अब नहा धोकर और थोड़ा आराम करके शाम को सीधे बोधगया की तरफ निकल लिए। गया के रेलवे स्टेशन के बाहर से ही आपको बोधगया की तरफ जानेके लिए ऑटो मिल जाएंगे लेकिन वो आपको गया के आखिर में पड़ने वाले एक चौराहे ( नाम भूल गया ) पर उतार देते हैं और फिर वहां से दूसरा ऑटो पकड़ना पड़ता है। हर एक मिनट में ये सेवा उपलब्ध है। गया से निकलते ही आर्मी कैंटोनमेंट एरिया शुरू हो जाता है शानदार रोड भी। आधा घंटे में बोधगया की जमीन पर होते हैं।

आइये आज की यात्रा जायंट बुद्धा की मूर्ति से करते हैं।  ऑटो आपको जहां उतारता है वहीँ साइन बोर्ड लगा हुआ है जायंट बुद्धा का रास्ता बताने वाला।  एक बात ये भी है कि बोधगया बहुत बड़ा भी नही है , बिलकुल छोटा सा है और आप कहीं भी हों बोधगया में , आपकी  कुछ न कुछ ऐसा जरूर होगा जिसे आप देखना चाहेंगे।  जायंट बुद्धा या ग्रेट बुद्धा की ये मूर्ति 82 फुट ऊँची है जो कमल के फूल पर ध्यान मुद्रा में बैठे बुद्ध का रूप  दिखाती है।  लगभग सात साल में 12, 000 कारीगरों ने इसे सैंडस्टोन ब्लॉक और लाल ग्रेनाइट से तैयार किया है। 1982 में इसका निर्माण शुरू हुआ जो 1989 तक जाकर समाप्त हुआ। 18 नवम्बर 1989 को 14 वें दलाई लामा ने इसका विधिवत उद्घाटन किया और इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया।

आइये उस दिन के फोटो देखते चलते हैं :




चलो गया चलते हैं
बोधगया प्रवेश द्वार


ग्रेट होलीलैंड मॉनेस्ट्री के अंदर

ग्रेट होलीलैंड मॉनेस्ट्री के अंदर

ग्रेट होलीलैंड मॉनेस्ट्री के अंदर


जाइंट बुद्धा







जाइंट बुद्धा

जाइंट बुद्धा















ध्यान की विभिन्न मुद्राएं

ध्यान की विभिन्न मुद्राएं

ध्यान की विभिन्न मुद्राएं

ध्यान की विभिन्न मुद्राएं

ध्यान की विभिन्न मुद्राएं

ध्यान की विभिन्न मुद्राएं

ध्यान की विभिन्न मुद्राएं

ध्यान की विभिन्न मुद्राएं

ध्यान की विभिन्न मुद्राएं

ध्यान की विभिन्न मुद्राएं



ये जिएंट बुद्धा की पीठ
कुछ और फोटो

कुछ और फोटो

कुछ और फोटो

कुछ और फोटो

















                                              


                                                                                                यात्रा आगे जारी रहेगी :






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