शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

Dalit Prerna Sthal Noida -Part 3

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करिये !!​



क्यूँकि मैं तीसरे जोन से इस पार्क में घुसा था इसलिए दुसरे जोन को पर करते हुए पहले जोन में आना पड़ा ! दुसरे जोन में केवल पार्क ही है ! रस्ते के दोनों तरफ घना जंगल है लेकिन बिलकुल मेन्टेन किया हुआ है ! पीपल और नीम के पेड़ बहुतायत में हैं लेकिन कुछ पेड़ और भी हैं जिनकी जानकारी मुझे नही है ! दुसरे जोन से पहले जोन में प्रवेश करते शानदार फव्वारा दिखाई देता है जो सुंदर हरी घास के पार्क के बगल में है ! फव्वारे के तीन लेयर हैं जिनमें चारों तरफ हाथी लगे हुए हैं , छोटे -बड़े ! इन फव्वारों के नजदीक तक जाने के लिए शानदार सीढ़ियां बनी हुई हैं ! यहां से थोड़ा आगे चलकर मुख्य "महल " दिखाई देता है जिसमें 25 फुट ऊँचे दरवाजे लगे हुए हैं ! गज़ब की बात ये है कि इन दरवाज़ों के हैंडल भी हाथी की सूंड जैसे बने हुए हैं ! मुख्य दरवाज़े के दायें तरफ "दलित प्रेरणा स्थल " के बारे में हिंदी और अंग्रेजी में विस्तार से लिखा हुआ है जबकि बायीं तरफ "नॉएडा " का नाम लिखा है ! सामने डॉ.आंबेडकर , काशीराम और मायावती की कम से कम 15 -15 फ़ीट ऊँची प्रतिमाएं लगी हुई हैं ! बीच में डॉ. अम्बेडकर हैं और दायें -बाएं काशीराम जी और मायावती हैं ! 


अंदर तीन अलग अलग दिशाओं में मेहराब बने हुए हैं जिनमें मायावती और काशीराम के जीवन वृतांत के चित्र और उनके विषय में लिखा हुआ है ! मायावती के माता - पिता का चित्र भी उकेरा गया है एक जगह ! इसके अलावा दलित महापुरुषों के कार्यों को भी दिखाया गया है ! तीनों की मूर्ति के बिलकुल पीछे डॉ.अम्बेडकर का वो चित्र दिखाया गया है जिसमें वो भारतीय संविधान को "संविधान सभा " को प्रदान कर रहे हैं ! आपको इस "महल " के हर कोने में हाथी की प्रतिमाएं और उसकी आकृति उकेरी हुई दिखाई देगी ! मायावती , काशीराम और डॉ.अम्बेडकर की प्रतिमा के ऊपर फाइबर की शीट इस तरह से लगाईं है कि उस पर हमेशा धूप आती रहती है !

आइये फोटो देखते हैं :
 
 
 

ये शंख ( cone ) सच में सुन्दर लगते हैं


















पहिचान तो पा रहे होंगे ?




मूर्तियों के ऊपर धूप लगातार बनी रहती है

ये छत है

दलित महापुरुषों की जीवन यात्रा का वर्णन भी उकेरा गया है

डॉ.अम्बेडकर का वो चित्र दिखाया गया है जिसमें वो भारतीय संविधान को "संविधान सभा " को प्रदान कर रहे हैं !



बीच में मायावती अपने माता -पिता के साथ






काशीराम जी , बामसेफ के दिनों में साइकिल पर प्रचार करते थे

मायावती और काशीराम


"महल " की दीवारों पर शानदार कलाकृतियां














इन दरवाज़ों के हैंडल भी हाथी की सूंड जैसे बने हुए हैं








निर्माण का नमूना देखिये



निर्माण का नमूना देखिये






निर्माण का नमूना देखिये












यहाँ भी हाथी दिखेगा














































 
चलो ! अब लौट चलते हैं अपने घर ! किसी अगले पड़ाव तक जाने के लिए यहाँ से लौटना ही होगा ! 
 
 
 
नोट : इस ब्लॉग श्रंखला को कृपया किसी पार्टी विशेष का प्रचार न समझा जाए और न मुझे इस पार्टी विशेष का समर्थक ! केवल एक घूमने लायक जगह का वर्णन है ये बस !!
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