मंगलवार, 10 मई 2016

Journey from Patna to Varanasi by Passenger Train

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पहली वाली पोस्ट में ये बात हो चुकी है कि मैं पटना की कुछ ही जगह देख पाया था , केवल गांधी मैदान और गोलघर ! पटना की इस पोस्ट को बहुत ही अच्छा रिस्पांस मिला , धन्यवाद आप सभी का ! लेकिन इसी के साथ एक गड़बड़ भी हुई , कुछ के कमेंट स्वतः ही गायब हो गए ! भगवान् जाने कैसे ! हर्षिता जी , रूपम जी और मृदुला दिवेदी जी , क्षमा चाहूंगा ! पटना में , जैसा कि पहले बताया जा चूका है, मैं कॉलेज के काम से गया था तो स्वाभाविक है कि सब खर्च कॉलेज को ही देना था लेकिन अब मेरा अपना खर्चा शुरू होने का समय था तो सबसे पहले ये काम किया कि जो होटल का रूम 1500 रूपये प्रतिदिन के हिसाब का था उसे तुरंत बदलकर उसी होटल के 170 रूपये प्रतिदिन वाले वातानुकूलित डॉरमेट्री में अपने आपको शिफ्ट कर लिया ! ये जिंदगी का पहला मौका था डॉरमेट्री में रात गुजारने का , लेकिन सच में मस्त लगा ! एक तो थका हुआ और ऊपर से बढ़िया ठंडी ठण्डी हवा , जी को चैन मिल गया और शरीर को आराम !



सुबह 5 बजकर 40 मिनट की ट्रेन थी , पटना से वाराणसी ! पैसेंजर ट्रेन ! इस 229 किलोमीटर की यात्रा का किराया था मात्र 50 रुपया ! मैं नहा धोकर 5 बजे ही स्टेशन पहुँच गया, हालाँकि टिकट खिड़की पर लाइन लम्बी तो थी लेकिन फिर भी 15 मिनट में टिकट मिल गया था ! अभी ट्रेन निकलने में टाइम है , एक कप चाय खेंच लेता हूँ ! ट्रेन चल पड़ी है , आइये पटना से वाराणसी चलते हैं , भोले बाबा की नगरिया !

जब तक अगला स्टेशन आये , आपको भोले बाबा की बात बताता चलता हूँ ! अब से करीब 11 साल पहले मैं शादी के बंधन में बाँध दिया गया था ! आपको शायद जानकारी होगी , उत्तर भारत में अविवाहित लड़कियां सोमवार का व्रत रखती हैं , उनकी ऐसी मनोकामना रहती है कि उन्हें भगवान शिव के जैसा वर प्राप्त हो ! लेकिन भगवान शिव तो गुस्सैल भी थे और विनाशक भी , तो क्या ऐसा पति स्वीकार होता है लड़कियों को ? खैर , ये  अलग बात है ! तो साब विवाह से पहले हमारी पत्नी ने भी शिव जैसा वर पाने के लिए सोमवार का व्रत रखना शुरू कर दिया ! आश्चर्य इस बात का कि पहले ही सोमवार के व्रत के बाद उन्हें हम मिल गए ! एक दिन हमने ऐसे ही मजाक कर दिया कि अगर कैसे भी तुम 16 व्रत पूरे कर लेती तो संभव है कि साक्षात् शिव ही मिल जाते , नहीं तो कम से कम राहुल गांधी तो मिल ही जाता ! कैलकुलेशन करके देखिये , एक सोमवार मतलब मैं , और सोलह सोमवार !! आप खुद कर लेना !

लो जी इतनी देर में हमारी ट्रेन पटना से निकलकर सचिवालय हल्ट को पार करते हुए फुलवारी शरीफ आ पहुंची है ! यहां पटना का हवाई अड्डा है ! इस एयरपोर्ट का नाम -लोकनायक जय प्रकाश हवाई अड्डा है ! आगे चलें ? अगला स्टेशन दानापुर आ गया है ! यहां से भी कुछ ट्रेन खुलती हैं , जैसे दानापुर -उधना एक्सप्रेस ! दानापुर , पटना से 10 किलोमीटर पहले है ! दानापुर में syberian cranes मानसून से पहले आते हैं और जाड़ा शुरू होते ही निकल लेते हैं ! यहां इस दरम्यान वो अपने बच्चे / अण्डे भी सहेजते हैं ! बढ़िया जगह है इस हिसाब से तो भाई !

ट्रेन रुकते चलते नेवरा (Neora ) पहुँच गयी और अब सदीसोपुर के लिए बढ़ चली है ! छोटा सा गांव ही लगा लेकिन इससे आगे है बिहटा ! याद आया कुछ ? हां, जी ! बिहटा में भारत का सर्वश्रेष्ठ तकनीकी संसथान आई आई टी है ! हालाँकि इसका नाम आई आईटी पटना के नाम से है लेकिन ये है बिहटा में ! बिहटा , पटना से 27 किलोमीटर दूर है ! आगे कोइलवर , कुल्हरिया स्टेशन आते हैं और फिर आरा जंक्शन ! एक कोई गाना भी है शायद आरा के नाम से - आरा हिलेला              पटना से करीब 49 किलोमीटर आ चुके हैं ! एक कप चाय और टोस्ट खा लेता हूँ , भूख लगने लगी है थोड़ी थोड़ी ! नाश्ता का समय तो है ही , सुबह के 7 बजे हैं ! कारीसाथ , बिहिया , बनही निकल चुके हैं अब रघुनाथपुर पहुँच रहे हैं ! रघुनाथपुर से निकलकर आगे टुड़ीगंज है , अजीब सी बात है कि हिंदी में ये टुड़ीगंज है जबकि अंग्रेजी में ट्विनिंग गंज ( Twinning Ganj ) है ! आगे डुमरांव , बरूना और बक्सर आएंगे !  आ गए बक्सर ! सुबह के 9 बजे हैं और ट्रेन रुकी हुई है ! बिहार की फेमस चीज कच्चे चने , प्याज और टमाटर डाल के खा लेता हूँ ! अच्छा है , स्वादिष्ट ! अब चौसा , चौंसा आम नहीं , चौसा फिर बाराकलां , गहमर , भदौरा , उसिया ख़ास और अब आ गया दिलदार नगर जंक्शन ! इस गाडी ( 63233 ) का यहां पहुँचने का निर्धारित समय 10 :07 का है लेकिन इस समय 10 बजकर 23 मिनट हो रहे हैं , मतलब करीब करीब 15 मिनट देरी से चल  रही है ! चलता है इतना तो , आखिर भारतीय रेल है और वो भी पैसेंजर !

आगे चलते हैं , असल  में मैं नहीं बल्कि ट्रेन आगे चल रही है ! दरौली आया है , ज़मानिया भी निकल गया अब चांडिल आएगा और और फिर धीना और तुलसी आश्रम ! तुलसी आश्रम के बाद सकलडीहा और फिर कुचमन ! आहा , आ लिया मुगलसराय ! लगभग 212 किलोमीटर चलके आ चुके हैं और दोपहर का एक बज रहा है ! लू अपने पूरे शबाब पर है इसलिए अंदर से ही फोटो खींच ले रहा हूँ ! वाराणसी बस अब लगभग 18 किलोमीटर दूर है और दो स्टेशन व्यास नगर और काशी ही बीच में हैं फिर वाराणसी आ ही जायेगा !! मुगलसराय पर 10 मिनट रुक गयी ट्रेन , पता नहीं क्यों ? या फिर हो सकता है इतनी देर रूकती ही हो ! आ गया वाराणसी , दोपहर के 2 बजने को हैं , यानि अपने निर्धारित समय के करीब 40 मिनट पीछे पहुंची है ! लेकिन आखिर पहुँच गए बनारस !! चलो अब नहा धोकर बनारस  गलियों में घूमेंगे ! तब तक आप भी आराम कर लो !!

पटना और दानापुर के फोटो नेट से लिए है !















































एक बात कहनी है आपसे ! ये जो रेल यात्राएं हैं इनमें एक बढ़िया सा नगीना जल्दी ही जुड़ने की उम्मीद है ! नई दिल्ली से तिरुवनंतपुरम , केरल तक की पैसेंजर ट्रेन की यात्रा मई -2016 के आखिर में शुरू हो रही है ! ये यात्रा टुकड़ों में होगी , यानि जब भी समय मिलेगा तब ही ये यात्रा होती रहेगी !





                                                                                                         यात्रा जारी रहेगी :
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