शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

ताक धिना धिन ताके से.......Part- II

अगर आपको ये उर्दू कहानी पढ़ने में आनंद आ रहा है और आप इसे शुरू से पढ़ना चाहते हैं तो आपको यहाँ क्लिक करना पड़ेगा !! आइये आगे पढ़ते हैं :





बकरी बहुत दूर तक पहाड़ चढ़ती रही
लड़का खेलता रहा
कभी कभी मुंह उठाकर चिल्लाती " म्हें म्हें "
फिर हरी हरी घास चरने लगती
दोपहर तक चरती रही
एक तालाब में से पानी पीया !!
जब बकरी का पेट भर चुका
तो उसे शरारत सूझी
वो दूर जंगल में भाग गई
बकरी के पीछे लड़का भागा
वो बकरी को बुलाता रहा
मगर बकरी जंगल में भागती जा रही थी
वो दूर जंगल में भाग गई
लड़का उसके पीछे दौड़ता रहा और चिल्लाता रहा :

ताक धिना धिन ताके से
मामा कुंवर मर गई फ़ाक़े से 



अब बकरी पहाड़ पर चढ़ने लगी
वो पहाड़ बहुत ऊँचा था
उस पहाड़ के नीचे दरिया था
वो दरिया गहरा भी था
और चौड़ा भी था
और तेज़ भी था
लड़का डरने लगा !!
कहीं बकरी पहाड़ पर से न गिर पड़े
दरिया में डूब न जाए
लड़का बकरी को बुलाने के लिए ऊपर चढ़ा
लड़का ज्यों ज्यों ऊपर चढ़ता गया
बकरी और ऊपर चढ़ती गई
लड़के के पाँव में पत्थर लगा
लड़के के पाँव से खून निकलने लगा
लड़का थक गया था
वो एक पत्थर पर बैठ गया
और रोने लगा
जोर जोर से चिल्लाने लगा -

ताक धिना धिन ताके से
मामा कुंवर मर गई फ़ाक़े से


वहां पास ही झाड़ियां थीं
उन झाड़ियों में से एक खरगोश निकला
वो खरगोश सफ़ेद था
बड़ा खूबसूरत था
उस के लंबे लंबे कान थे
वो झाड़ियों में से फुदकता फुदकता निकला
वो लड़के के पास आया
उसे घूर कर देखा
उससे पूछा :
लड़के ! लड़के ! ! तुम क्यों रोते हो ?
जंगल में खैर तो है ?
लड़का बोला -

ताक धिना धिन ताके से
मामा कुंवर मर गई फ़ाक़े से


फिर लड़के ने जवाब दिया
मियां खरगोश क्या बताऊँ
मामा कुंवर की बकरी पहाड़ पर चढ़ गई है
मैं उसे बुलाता हूँ
वो आती नहीं
डर है कहीं पहाड़ पर से न गिरे
नीचे दरिया है
गिर कर दरिया में न डूब जाए
अब क्या करूँ ?
लड़का फिर चिल्लाया :

ताक धिना धिन ताके से
मामा कुंवर मर गई फ़ाक़े से


ज़ारी रहेगी :
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