गुरुवार, 20 अप्रैल 2017

Jal Mahal & Jantar Mantar : Jaipur

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हाथी नहीं मिले ! मिलने भी नहीं थे ! बारिश हो रही थी और ऐसे में या हाथी मिलते ? आमेर से अमर सागर जा पहुंचे , रजत शर्मा ने इसे बताया था कि यहाँ जरूर जाना , less explored जगह है ! लेकिन मुझे पसंद नहीं आई ! लौट चलते हैं जल महल की तरफ ! वापस आमेर के सामने पहुंचे और जल महल पहुंचे ! पहली बार पता लगा कि जयपुर में , मतलब राजस्थान में महिलाओं के लिए बस टिकट के किराए में छूट मिलती है ! शायद 20 प्रतिशत की ! बारिश जरूर रुक गई है लेकिन बादल बार बार गरज गरज कर ये उद्घोषणा कर रहे हैं कि हम कभी भी धमक सकते हैं , ज्यादा मौज न मनाओ ! 
 
 


आज फिर करीब 20 साल बाद यहां आया हूँ और तब में और आज में यहाँ बहुत परिवर्तन आ चुका है ! पहले कोई बॉउंड्री वाल नहीं थी और इसके किनारे पर जाना आसान था लेकिन अब बंदिशें बहुत हैं और आसपास बहुत सारी खाने पीने की दुकान भी लग गई हैं ! पिकनिक स्पॉट हो गया है अब ! इस महल की खासियत ये है कि तपते रैगिस्तान के बीच बसे इस महल में गरमी नहीं लगती, क्‍योंकि इसके कई तल पानी के अंदर बनाए गए हैं। इस महल से पहाड़ और झील का ख़ूबसूरत नज़ारा भी देखा जा सकता है। चांदनी रात में झील के पानी में इस महल का नजारा बेहद आकर्षक होता है। जलमहल अब पक्षी अभ्‍यारण के रूप में भी विकसित हो रहा है। जल महल के नर्सरी में 1 लाख से ज्‍यादा वृक्ष लगे हुए हैं। दिन रात 40 माली पेड़ पौधों की देखभाल में लगे रहते हैं। यह नर्सरी राजस्थान का सबसे उंचे पेड़ों वाला नर्सरी है। यहां अरावली प्‍लांट, ऑरनामेंटल प्‍लांट, शर्ब, हेज और क्रिपर की हजारों विभिन्नताएँ मौजूद हैं। यहाँ के 150 वर्ष पुराने पेड़ों को ट्रांसप्‍लांट कर नया जीवन दिया गया है। हर साल यहां डेट पाम, चाइना पाम और बुगनबेलिया जैसे शो प्‍लांट को ट्रांसप्‍लांट किया जाता है !

जयपुर-आमेर मार्ग पर मानसागर झील के मध्‍य स्थित इस महल का निर्माण सवाई जयसिंह ने अश्वमेध यज्ञ के बाद अपनी रानियों और पंडित के साथ स्‍नान के लिए करवाया था। इस महल के निर्माण से पहले जयसिंह ने जयपुर की जलापूर्ति हेतु गर्भावती नदी पर बांध बनवाकर मानसागर झील का निर्माण करवाया था । इसका निर्माण 1799 में हुआ था। इसके निर्माण के लिए राजपूत शैली से तैयार की गई नौकाओं की मदद ली गई थी। राजा इस महल को अपनी रानी के साथ ख़ास वक्‍त बिताने के लिए इस्‍तेमाल करते थे। वे इसका प्रयोग राजसी उत्सवों पर भी करते थे ।


इतिहास हो गया , अब और क्या रह गया ? कुछ नहीं शायद , क्योंकि इसमें अंदर जाने नहीं देते , देते भी होंगे तो बड़े बड़े लोग जाते होंगे , हमें कौन जाने देगा ? हम ठहरे आम न न , सामान्य आदमी ! तो अब जंतर मंतर चल रहे हैं लेकिन बारिश ने जबरदस्त बदला लेने का मन बनाया हुआ है ! ये 26 जनवरी का दिन है और भीग जाने के बाद क्या हालत हुई होगी , आप खुद समझ सकते हैं ! तो उसी हालत में एक बस में बैठे और जंतर मंतर जाने से पहले एक चाय पकोड़े की दूकान में घुस गए , बहाना चाय का था लेकिन वास्तव में बच्चों के कपडे बदलने थे ! येन केन प्रकारेण जंतर मंतर पहुँच गए हैं और अब आप अब तक की यानि जल महल की और जंतर मंतर की फोटू देखिये ! वैसे जंतर मंतर जैसी जगहें हमें भारतीय और हिन्दू होने पर गर्व करने का एक अवसर प्रदान करती हैं कि हमारे पूर्वज कितने विद्धान और खोजी थे लेकिन उन्हें किन्हीं कारणों से इतिहास में वो स्थान नहीं मिल पाया , जिसके वो योग्य थे ! बड़ा बेटा हर्षित , जयपुर जाने से पहले जंतर मंतर की जानकारी जुटा चुका था और उसके दिमाग में बस "दुनिया का सबसे बड़ा sun Dial " देखने का भूत सवार था ! छोटे को कुछ लेना देना नहीं इन सब बातों से , उसके लिए वो ही सत्य है जो उसके भाई ने कहा ! माँ -बाप मैडम गलत हो सकते हैं लेकिन बड़ा भाई गलत नहीं हो सकता ! खुद पिट सकता है लेकिन बड़े भाई को नहीं पिटने दे सकता , हाँ , खुद उससे लड़े तो चलेगा !! तो अगर आप जयपुर में हैं और आपके छोटे छोटे बच्चे साथ में हैं तो जंतर मंतर जरूर जाइये और हाँ , थोड़ा पढ़ कर जाइये क्योंकि ये छोटे छोटे बच्चे बहुत सवाल पूछते हैं ( अच्छा लगता है ) !! तो जी , मिलते हैं इधर उधर जाते हुए जैसलमेर में : 
 
 





आज बादलों से जंग जारी है




महाराजा की शाही सवारी




महाराजा की शाही सवारी: महाराजा विराजमान हैं































 मिलते हैं जल्दी ही:

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

Amber Fort : Jaipur

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विचार ये था कि पहले आसपास का जो भी कुछ है वो देख लें और फिर जयपुर शहर से दूर की जगह देखी जाएँ लेकिन बारिश ने सब गड़बड़ कर दिया ! तो विचार बनाया कि अब पहले " आमेर किला " चलते हैं ! बस यहीं हनुमान जी के मंदिर के पास ही मिल जायेगी , प्राइवेट भी और सरकारी भी ! 15 रूपये का टिकेट है और ये जो हनुमान मंदिर की बात कर रहा हूँ वो हवा महल के पिछले हिस्से यानि कि रोड की साइड में ही है ! आसपास मैट्रो का काम चल रहा है जिससे कीच खच्चड़ हुआ पड़ा था , लेकिन कुछ महीने -साल बाद यही कीच कच्चड़ मेट्रो के रूप में अच्छा और सुविधाजनक लगने लगेगा और हम भी लौटकर इसकी तारीफ करेंगे ! और हाँ , बस का इंतज़ार करते करते वहां पकौड़ी जरूर खा लीजियेगा , अच्छी बनाता है पेड़ के नीचे की दुकान वाला !

                            


महिला कंडक्टर थी बस में , अजीब तो नही लेकिन सुखद लगा ये देखकर कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपने पाँव जमा रही हैं ! ये दूसरी बार था जब मैं किसी महिला को बस कंडक्टर के रूप में देख रहा था ! इससे पहले एक महिला को मेरठ - ग़ाज़ियाबाद के रूट पर देखा है , मोटी सी है और अपनी सीट से उठती नहीं हैं टिकेट देने के लिए ! लेकिन ये मेरठ वाली मोहतरमा अनुबंधित बस कंडक्टर हैं और वो जयपुर वाली महिला सरकारी कर्मचारी ! एक अंतर और है , मेरठ वाली मोहतरमा विवाहित हैं और जयपुर वाली अविवाहित लगीं मुझे , हालाँकि मुझे इस बात से क्या लेना देना , मैं पहले से ही विवाहित हूँ और दो "शैतान " पुत्रों का पिता भी हूँ ! आप गलत समझ रहे थे मेरे बारे में :-) है न ? कोई नही , होता है !


तो जी,  लो आ गए आमेर ! आ तो गए लेकिन बारिश अभी भी हो रही है ! उतरे और अंदर भागकर एक सीमेंट की छतरी सी में घुस गए ! अभी अंदर जाने में वक्त लगेगा तब तक थोड़ा सा इतिहास पढ़ते जाते हैं ! जयपुर से करीब 11 किलोमीटर दूर आमेर शहर वैसे तो मीणा लोगों ने बसाया लेकिन इस पर 1550 ईसवी से लेकर 1614 ईसवी तक राजा मान सिंह ने राज्य किया ! लगभग 4 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला आमेर का किला आज की तारीख़ में राजस्थान का प्रसिद्द पर्यटक केंद्र बन चुका है , हालाँकि प्राइवेट प्रॉपर्टी होने के कारण महंगा भी है ! जब आप इस किले के अंदर प्रवेश करते हैं तो आपको अपने बाईं ओर एक विशालकाय " मावटा झील " दिखाई देगी ! इस किले में "दीवान ए आम ", " दीवान ए ख़ास ", शीश महल , जय मंदिर और सुख निवास हैं ! सुख निवास में ठंडी हवा आने का विशेष प्रबंध किया गया है जिससे राजा -रानियों को "सुख " मिल सके इसीलिए आमेर किले को "आमेर पैलेस " भी कहते हैं ! इस महल में राजपूत राजा और उनके परिवार के लोग रहे ! किले के मुख्य प्रवेश द्वार " गणेश द्वार " के पास में माता सिला देवी का मंदिर है और जो मूर्ति इसमें स्थापित है वो राजा मान सिंह को , जेस्सोर ( अब बांगला देश में है ) के राजा को पराजित करने पर प्रदान की गई थी ! सिला देवी को काली माँ का अवतार माना जाता है ! सिला देवी का मंदिर भले छोटा है लेकिन इसके कपाट , मतलब दरवाज़े बहुत ही सुन्दर हैं !

आगे और इतिहास साथ साथ चलता रहेगा ! हम आमेर फोर्ट में हैं जो यूनेस्को की लिस्ट में शामिल है लेकिन बारिश किसी भी लिस्ट में कभी भी शामिल हो जाती है , भले आप उसे शामिल करो या न करो ! इसे आना है तो आएगी , जाना है तो जायेगी ! मेरी तरह नौ बजे से पांच बजे तक की नौकरी नहीं करती किसी की ! और आज 26 जनवरी के दिन दिल्ली के राजपथ से लेकर यहाँ जयपुर तक बस अगर किसी का राज चल रहा है तो बारिश का चल रहा है ! टीवी पर गणतंत्र दिवस दिखाया जा रहा है , आबूधाबी का कोई प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति आया हुआ है !

हमारा आमेर किले तक आने का मुख्य मकसद बच्चों को हाथी की सवारी कराना था लेकिन बारिश की वजह से हाथी बाहर नही हैं आज या फिर बंद कर दिया होगा ! जो देखने , जो करने आये थे वो हुआ नही तो इतनी तेज बारिश में टिकेट लेकर पैसा नही फूंकना चाहेंगे ! तो इस बार माफ़ करियेगा क्योंकि मैं आपको बाहर से ही मतलब जहाँ तक मुफ्त में जा सकते हैं और फोटो खींच सकते हैं , वहीँ तक के फोटो दिखा पाऊंगा ! 

बाहर आ गए ! जयपुर में कोठारी जी के यहां रजत शर्मा ने अमर सागर के बारे में बताया था और कहा था वहां जरूर जाना ! यहाँ ज्यादा लोग नही जाते , मतलब थोड़ी छुपी सी जगह है ! चल दिए ! ऑटो किराये पर लिया , 150 रूपये लिए ! हालाँकि उतना दूर नहीं है और आराम से पैदल जा सकते हैं लेकिन हमें पता भी नही था और बारिश भी हो रही थी ! इसे 17 वीं शताब्दी में बनाया गया और ये उस वक्त जयगढ़ और आमेर फोर्ट के निवासियों के लिए पानी का मुख्य स्रोत था ! जब आप इस रास्ते से जाते हैं तो खेरी गेट के पास " अनोखी म्यूजियम " जरूर देखकर जाइये , हालाँकि हम जिस दिन गए थे उस दिन 26 जनवरी थी और ये बंद था ! अमर सागर लेक जरूर है लेकिन बहुत गन्दी रहती है ! हमें तो अच्छा नहीं लगा यहाँ आना , बाकी सबकी अपनी अपनी पसंद होती है !

आइये आमेर फोर्ट को फोटो के नजरिये से देखते हैं :











































जारी रहेगा :

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