गुरुवार, 11 मई 2017

Patwon ki Haveli : Jaisalmer

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जैसलमेर फोर्ट देखने के बाद अब हमारा जैसलमेर की प्रसिद्द हवेलियों को देखने का विचार था , शाम हो चुकी थी या ये कहूं कि रात घिर आई थी ! बहुत ज्यादा तो नहीं देख पाएंगे लेकिन "पटवा हवेली " जरूर देखेंगे ! आज इतना ही समय है अपने पास ! ऐसे जैसलमेर में पटवा हवेली के अलावा सालिम सिंह की हवेली और नत्थामल की हवेली भी देखने लायक हैं !! सालिम सिंह की हवेली भी जाएंगे लेकिन फिलहाल तो नहीं , फिलहाल तो हम बस पटवा हवेली ही देख पाएंगे ! सात बज रहे होंगे या इससे कुछ कम होगा , साढ़े छह होगा ! जैसलमेर की गलियों से निकलते हुए , शानदार दीवारों को देखते हुए , हवेलियों को देखते हुए आखिर पहुँच ही गए पटवा हवेली ! जैसलमेर के घरों की दीवारों पर विवाह संस्कार को बहुत ही बेहतरीन रूप में दिखाया जाता है ! लक्ष्मी -गणेश जी की मूर्ति बनाकर वर -वधू के नाम लिखे जाते हैं ! आकर्षक लगता है ! और हाँ , विवाह संस्कार की तिथि , तारीख भी लिखी होती है ! आगे फोटो देखेंगे आप ! 

Patwa Haveli :

हवेली ! जानते हैं आप अच्छी तरह ! लेकिन एक बात नहीं जानते होंगे कि हवेली हिंदी शब्द नहीं है ! हवेली , अरब से लिया गया शब्द है जिसका मतलब होता है "प्राइवेट घर " ! और ये शब्द मतलब हवेली , भारत , पाकिस्तान , बांग्लादेश में खूब प्रचलन में है ! भारत में सबसे ज्यादा हवेलियां राजस्थान , गुजरात और पंजाब में देखने को मिलती हैं ! मैं नए नए बंगलों की बात नहीं कर रहा , उन हवेलियों की बात कर रहा हूँ जो आजादी से पहले राजे रजवाड़ों का निवास स्थान हुआ करती थीं ! राजस्थान के कई शहरों में शानदार हवेलियां देखने को मिलती हैं जैसे बीकानेर , जोधपुर , जैसलमेर ! और जैसलमेर में "पटवों की हवेली " जैसलमेर की सबसे बड़ी हवेली मानी जाती है ! ये वास्तव में एक हवेली नहीं है बल्कि पांच हवेलियों से मिलकर बनी है जिसमें पहली "कोठारी की पटवा हवेली " सबसे ज्यादा आकर्षक और प्रसिद्ध है ! दूसरी बात ये कि ये हवेली जैसलमेर की सबसे पहली हवेली है जिसे सन 1805 में गुमान चंद पटवा ने बनवाया ! गुमान जी बड़े रईस थे और उन्होंने अपने पाँचों बेटों के लिए हवेलियां बनवाई जिन्हें पूरा होने में 50 साल लग गए ! इस हवेली में कई तरह के ताले ( Locks ) और राजस्थानी पगड़ियां देखने का मौका मिला ! इस हवेली की दीवारें राजशाही होने का सबूत देती हैं ! पूरी कहानी सुनना चाहेंगे ? कि कैसे पटवा हवेली के साथ कोठारी नाम जुड़ गया ? आइये बताता हूँ :

हुआ यूँ कि पटवा परिवार 18 वीं सदी के शुरू में अपने कारोबार को चलाने के लिए बहुत संघर्ष कर रहा था तो उन्हें एक जैन मुनि ने जैसलमेर छोड़कर कहीं और जाने और वहीँ अपना कारोबार करने की सलाह दी ! पटवा परिवार इस विषय में राय मशविरा करने लगा और दिन बीतने लगे , इस दरम्यान कारोबार में तरक्की होने लगी और उनका कारोबार बहुत तेजी से बढ़ने लगा ! जब पैसा आया तो गुमान चंद पटवा ने अपने पांच बेटों के लिए अलग अलग हवेलियां बना दीं , लेकिन कहते हैं " हर दिन होत न एक समाना " ! कारोबार फिर से बिगड़ने लगा और ये नौबत आ गई कि गुमान चंद को जैसलमेर छोड़कर जाना पड़ा और हवेलियां किसी और को देखरेख के लिए दे गए ! कालांतर में वो "केयर टेकर " ही हवेलियों के मालिक बन गए और इन हवेलियों में से पहली और सबसे शानदार हवेली किसी "कोठारी " साब को बेच दी ! तो इस तरह अब ये हवेली Kothari 's Patwa Haveli  हो गई !!

आज 27 जनवरी है मालिकों और ठण्ड बहुत है ! आज और कहीं नहीं जाना ! हाँ , ये हवेली सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहती है ! हम भी लगभग साढ़े छह बजे पहुंचे होंगे , हमारे आगे -पीछे भी कुछ लोग थे ! लेकिन हमारे पीछे पीछे वहां के "केयर टेकर " हवेली को बंद करते जा रहे थे , जो कमरा हमने देख लिया , वो बंद कर दिया ! 30 रूपये का टिकट है और कैमरा टिकेट भी लगता है , याद नहीं आ रहा कितने का है , 20 या 25 का होगा , हो सकता है 30 का भी हो , लेकिन 30 से ज्यादा नहीं होगा ! याददाश्त कमजोर होने लगी है , होगी ही दाढ़ी के बाल भी सफ़ेद होने लगे हैं ! हीहीही ! आप फोटो देखते जाओ , बादाम खा लूँ याददाश्त बनी रहेगी नहीं तो अभी तो टिकट के दाम भूला हूँ , किसी दिन बीवी को भूल गया तो ..... .....कहीं इसी चक्कर में तो वो अब बादाम नहीं खिला रही ... ..... :)


ये जैसलमेर के घरों की दीवारें हैं ! अच्छी हैं न ?

पटवा हवेली के अंदर



अलग अलग तरह , अलग अलग शेप के ताले देखने को मिले( These are locks of Different & Interesting Shapes )

ये भी lock ही है

ये भी
ये पहिचान में आया ?  पहले ऐसे बर्तन शादी -विवाह में उपयोग में लाये जाते थे


Rajasthani Pagdi







हुक्का ! ट्राई किया है कभी ?





रात में हवेली का बढ़िया फोटो नहीं आया
ज़रा गौर से देखिये हुजूर



                                                                                            जारी रहेगी :

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