गुरुवार, 20 जुलाई 2017

Nandikund-Ghiyavinayak Trek : Delhi To Ransi

राम राम मित्रो !!


एक नई पोस्ट लिखने जा रहा हूँ लेकिन उससे पहले कुछ और बात भी करना चाहता हूँ ! इस सीरीज में जो पोस्ट आएँगी वो विशुद्ध रूप से ट्रैकिंग की पोस्ट होंगी ! आज इस सीरीज की शुरुआत करते समय थोड़ा सा इमोशनल हो गया हूँ ! कारण कुछ ख़ास नहीं , बस आप सबका साथ और समर्थन है ! पीछे मुड़कर जून 2016 को देखें तो मैं एक छोटा -मोटा सा घुमक्कड़ , अनजान सा ब्लॉगर था ! था क्या , आज भी हूँ लेकिन इस एक वर्ष में थोड़ी पहिचान मिली है और आपका समर्थन भी बढ़ा है ! तो इस सबकी प्रेरणा निश्चित रूप से उन अनगिनत पाठकों और मेरे मित्रों से मिलती है जिन्होंने मुझे ट्रैकिंग से परिचित कराया और ट्रैकिंग करने का साहस दिया ! बहुत लोग हो सकते हैं लेकिन किसी एक का नाम लेना भी मुश्किल होगा ! फिर भी अपनी तरफ से अमित तिवारी जी , बीनू भाई का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिनकी प्रेरणा से ही आगे बढ़ने की हिम्मत मिली ! ट्रैकिंग , असल में प्रसव पीड़ा की तरह है जिसमें शारीरिक और मानसिक कष्ट के बाद जो फल प्राप्त होता है वो अंततः आनंद और ख़ुशी से सराबोर कर देता है !! जून 2016 से लेकर जून 2017 तक यूँ खूब सारी यात्राएं हुईं और एक बार हिन्दी के अग्रणी समाचार पत्र "दैनिक जागरण " में सतोपंथ -स्वर्गारोहिणी का यात्रा वृतांत भी छप गया ! 900 रूपये भी मिले :-) ! 25 दिसंबर 2016 को प्रकशित हुआ था !! और सच कहूं तो यही यात्रा थी जिसने थोड़ी पहिचान दी और हौसला भी बढ़ाया कि जा योगी , अस्थमा को पछाड़ कर आगे बढ़ !! कल ही गुरुदेव श्री ललित शर्मा जी के माध्यम से एक समाचार पात्र में साक्षात्कार भी प्रकाशित हुआ है ! धन्यवाद आपका !!

इस यात्रा सीरीज में आप मध्यमहेश्वर मंदिर के दर्शन करते हुए , नंदी कुंड और फिर 5000 मीटर ऊँचे घीया विनायक पास को पार करते हुए बर्मा बुग्याल और मानपाई बुग्याल में मस्ती करते हुए , 8वीं शताब्दी के बंशी नारायण मंदिर को देखेंगे और फिर कल्पेश्वर मंदिर पर अपनी यात्रा खत्म होगी ! दो -तीन बातें कहनी हैं यहां ! ये यात्रा 15 जून 2017 को शुरू होनी थी लेकिन मेरे पापा की तबियत खराब होने के कारण एक दिन आगे बढ़ गई और 15 के बजाय 16 जून को शुरू हो सकी ! आप कह सकते हैं कि मुझे पापा की तबियत खराब होने की वजह से जाना ही नहीं चाहिए था , बिल्कुल ! आपकी बात सही है , लेकिन मैं अपने पापा के लिए भगवान से प्रार्थना करना चाहता था और मुझे यही तरीका बेहतर लगा ! पापा की तबियत अभी भी ठीक नहीं है , उम्र हो रही है तो रिकवर करना कठिन हो जाता है !!

17 जून की शाम को रांसी गाँव में अपने मित्र रविंद्र भट्ट जी के यहां पहुँच गए थे और फिर 18 जून से इस ट्रैक पर यात्रा शुरू कर दी ! आगे बढ़ने से पहले मुझे लगता है आपको पूरा कार्यक्रम ( itinerary ) बता दी जाए जिससे आपको मेरी बात समझने में आसानी होगी !

Day 0 : 16/06/2017 : 
Depart from Delhi ( Ghaziabad )​, Overnight Journey to Haridwar

Day 1 : 17/06/2017 : 

Haridwar to Kund to Ukhimath to Ransi (2100 Meter)
 * Talk to Porters , Shopping of Groceries, etc at Ransi

Day 2 : 18/06/2017 : 

Ransi to Nanu Chatti (2700 Meters , 8 Km distance)

Day 3 : 19/06/2017 : 

Nanu Chatti to Madhyamaheshwar Temple ( 3300 Meters , 10 Km) to Budha Madhyamaheshwar (3500 Meters , 2 Km)

Day 4 : 20/06/2017 : 

Budha Madhyamaheshwar to Rikhana to Dhola Khetrapal to Kachni Dhar (4200 Meters , 11 Km)

 Day 5 : 21/06/2017 : 
Kachni Dhar to Luntri Khark to Pandusera or Pandav Sera (4000 Meters , 10 Km)

Day 6 : 22/06/2017 : 

Pandusera to Nandikund (4500 Meters , 8 Km)
* Explore Nandikund and Nearby places

Day 7 : 23/06/2017 : 

Nandikund to Ghiyavinayak Pass ( 5000 Meters ) to Vaitarni to Kail to Burma Bugyal to Achri Kona to Manpai Bugyal (3900 Meters , 12 Km)

Day 8 : 24/06/2017 : 
Manpai Bugyal to Menghat to Khanddwari to Banshinarayan Mandir (4000 Meters , 12 Km) 
                 
Day 9 : 25/06/2017 : 

Banshinarayan Temple to Devgram (2200 Meters , 12 Km) Explore Dhyan Badri and Kalpeshwar  ( 4 km) to Chamoli (Hotel Stay)

Day 10 : 26/06/2017 : Chamoli to Haridwar to Delhi ( Overnight Journey) . 



तो हमारी यात्रा इस प्रोग्राम के हिसाब से आगे बढ़ती जायेगी ! इस यात्रा में आपको एक से एक नए स्थानों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा , प्राचीन कहानियां मिलेंगी ! ट्रैकिंग में सबसे अच्छी बात ये है कि आप उन जगहों को देख पाते हैं जहां या तो कोई नहीं जाता या फिर गिने चुने लोग ही जाते हैं ! हमारे इस नंदीकुंड -घिया विनायक पास ट्रेक पर हमसे पहले सिर्फ 8 विदेशी लोग इस सीजन में गए एक ग्रुप में ! हमारे साथ , आगे -पीछे कोई नहीं था ! होगा भी नहीं , क्यूंकि अगला कोई एक ग्रुप सितम्बर में जाएगा ! हम भाग्यशाली हैं कि अपने दूसरे ट्रैक में ही लगभग 5000 मीटर की ऊंचाई तक जाकर सुरक्षित वापस आ गया ! सुरक्षित इसलिए कहा क्योंकि पिछली बार सतोपंथ -स्वर्गारोहिणी ट्रैक पर पैर मुड़ गया था और आखिरी पूरा दिन दर्द में कराहते हुए चलना पड़ा था ! खैर , आप सबके शुभेच्छाओं के कारण बिल्कुल सही और बढ़िया तरह से ये ट्रैक पूर्ण हुआ ! आगे की बात , अगली पोस्ट में !!














ये जो यहां फोटो दी गई हैं ये पूरी यात्रा से ऐसे ही चुनी हुई 10 फोटो हैं ! कोई सीरियल नहीं है , कोई कैप्शन नहीं ! अगली बार सब कुछ बताया जाएगा !!  :)
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