मंगलवार, 21 जुलाई 2015

नीलकण्ठ महादेव मंदिर :ऋषिकेश


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ऋषिकेश बिलकुल सुबह ही पहुँच गया था। चाय पीकर सीधा त्रिवेणी घाट का टैम्पो पकड़ लिया। पूरा ऋषिकेश जैसे अभी सोया हुआ था बस वो ही लोग दिखाई दे रहे थे जो पूजा पाठ वाले थे। थोड़ी सी रौनक घाट पर जरूर दिखाई दी। स्नान किया ! गंगा स्नान ! बचपन में जब कभी पिताजी ने गंगा स्नान के लिए ले जाना चाहा , माँ तुरंत मना कर देती , अभी छोटा है ! फिर ये हुआ कि सालों गंगा को देखे बीत गए और अब अवसर मिल जा रहा है। बहुत ठंडा पानी और बहुत तेज धार। लेकिन वहां लगी हुई लोहे की जंजीरें नहाना आसान कर देती हैं। जय हो गंगा मैया की ! त्रिवेणी घाट से ऊपर आकर अब नीलकण्ठ जाना था। एक टैम्पो पकड़ा और राम झूला पहुँच गए। राम झूला को पार करके स्वर्गाश्रम होते हुए नीलकण्ठ के स्टैण्ड पहुँच गया। यहां से आपको सिर्फ महिन्द्रा या सूमो ही मिलती हैं और उनका एक तरह से यहां मोनोपोली है। 12 सवारी से कम पर जाएंगे नही और अगर कोई ग्रुप मिल गया तो आपको उतार देंगे , आप दुसरे से आ जाना ! लेकिन अच्छी बात ये है कि एक एक करके हर 5 मिनट पर एक गाडी निकलती है , कोई न कोई तो ले ही जाएगा अकेले को भी। आधा घंटे के बाद नंबर आया मेरा एक गाडी में। 2007 में आना जाना यानि दोनों तरफ का किराया 80 रुपया था अब 120 हो गया है। अच्छी खासी भीड़ होती है इन दिनों में , जो लोग ऋषिकेश आते हैं घूमने के लिए वो इधर भी आ जाते हैं। लगभग साढ़े दस बजे मैं नीलकंठ महादेव मंदिर पर था। यहाँ आने का प्रयोजन दूसरा था। यहां एक पीपल का वृक्ष है , कहते हैं इस पर लाल धागा बाँधने से मन की इच्छा पूरी होती है , तो मैंने भी 2007 में भगवान से एक इच्छा पूरी करने की अर्जी लगा दी और वो अर्जी स्वीकार भी हो गयी तो अब वो धागा खोल के आना था और एक और अर्जी देनी थी। दोनों काम कर आया ।


वहां गाड़ियों की इतनी भीड़ हो जाती है कि अगर आप थोड़ी देर से जा रहे हैं यानि 10 बजे के बाद तो आपको आपकी गाडी बहुत दूर पीछे ही रोक देनी पड़ेगी। पैदल चलते चलते पसीने आ गए। हाथ -मुंह धोकर मंदिर में प्रवेश कर रहा था कि उधर से एक जाना पहिचाना चेहरा दिखाई पड़ा ! ये वरिष्ठ पत्रकार एन.के सिंह जी थे ! आप जानते हैं उन्हें ? वो मुझे नही जानते लेकिन मैंने उन्हें कई बार टेलीविज़न पर होने वाली बहस में देखा है इसलिए पहिचानता हूँ ! मैंने तुरंत पूछा -आप एन.के सिंह जी ? थोड़ी सी बात चीत हुई ! उनकी धर्मपत्नी और उनकी बेटी साथ में थे ! सेल्फ़ी लेना भूल गया !!


अब ज़रा नीलकण्ठ महादेव के बारे में बात कर लेते हैं ! लगभग 5500 फीट की ऊंचाई पर स्वर्ग आश्रम की पहाड़ी की चोटी पर नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया गया था। विषपान के बाद विष के प्रभाव के से उनका गला नीला पड़ गया था और उन्हें नीलकंठ नाम से जाना गया था। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहां भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्थान करते हैं।


तो आइये फोटो देखते हैं !


त्रिवेणी घाट ऋषिकेश
त्रिवेणी घाट ऋषिकेश

जय गंगा मैया

जय गंगा मैया

राम झूला

राम झूला

जय नीलकण्ठ महादेव

जय नीलकण्ठ महादेव








ये किसानों की आजीविका


















कुछ फोटो ब्लर्ड हैं ! क्या कर सकता हूँ !


                                                                                                      आगे भी जारी रहेगी:
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